मेरी अविस्मरणय चोपता यात्रा सर्दियों में-भाग-4
हम सब ने प्लान बनाया हुआ था की सुबह सुबह अगले दिन पांच बजे ट्रैक सुरु कर देंगे तुंगनाथ मंदिर के लिये लकिन सब की नींद खुली सुबह सात बजे वो भी सब एक दूसरे को शोचलाय जो कैंप का साथ ही अटैच्ड था जाने का आदेश दे रहे थे तांकि थोड़ी देरऔर बिस्तर मैं लेटे रहे क्यंकि सुबह सुबह बहुत ठण्ड थी । इसी बात पर मुझे एक शेर याद आ गया जो पर्फेक्ट्ली यहाँ पर फिट बैठता है
"बड़ी बेवफ़ा हो जाती है ग़ालिब
ये घड़ी भी सर्दियों में,
5 मिनट और सोने की सोचो तो,
30 मिनट आगे बढ़ जाती है"
फिर मैने ही अपनी संकल्प शक्ति का इस्तेमाल किया और झट से रजाई कम्बल से बाहरआ गया । अब मैं गरम पानी के इंतजाम के लिये बाहर निकला कैंप से। वाह क्या नजारा था चारो तरफ वो दर्श्य बड़ा ही मनमोहक था । चारो तरफ बर्फ ही बर्फ जैसे हिमयुग आ गया हो । सब अभी सो रहे थे कोई भी नहीं जागा हुआ था । मैं केयर टेकर वाले कैंप की तरफ गया वो सब भी सो रहे थे तो मैं वापिस अपने कैंप मैं आगया और शौच के लिये बैठ गया । अब बारी आती है पानी से धोने की तो पानी जो रात का रखा हुआ था वो जमा हुआ था ठोस बर्फ मैं अब अब जैसे तैसे मैने पानी से अपनी नितम्ब धोये बोले तो अभी तक सबसे कम पानी नीतिमबो को धोने मैने वही यूज़ किया था ठंडा जो इतना था । फिर एक एक करके सब अपना नंबर लगाते रहे तथा इस शीत परीक्षा से गुजरते रहे । शौच से निवर्थ होने के बाद वे सब फिर बिस्तरों के अंदर घुस गए और चाय का इन्तजार करने लगे । मैं बाहर प्रकर्ति की ख़ूबसूरती को निहारने मैं व्यस्त था क्यंकि मैने पहले इतनी बर्फ नहीं देखि थी । दरशल मुजमे जो ऑफबीट जगहों मैं घूमने का कीड़ा जो जागा वो चोपता टूर से स्टार्ट हुआ था खैर अब तो चोपता काफी प्रसिद हो गए है । इससे पहले मैं मुसूरी, नैनीताल, हरिद्वार, ऋषिकेश, चम्बा,वैष्णो देवी,रानीखेत, आदि भीड़ भाड़ वाली जगहों पर ही गया था । इतने मैं हमारी चाय आ गयी और सबने चाय की चुस्किया मारनी सुरु कर दी । फिर सब बाहर आ गये फिर अचानक बर्फ बारी गिरनी सुरु हो गयी । सबकी खुसी का कोई ठिकाना नहीं रहा सब मन्त्र मुगद हो गये क्यंकि सबका वो पहले अनुभव था बर्फ बारी का ।
प्रकर्ति ने हमारी सुन ली थी । मेरे ख्याल से बर्फ बारी का पहला अनुभव एक पहले प्यार जैसा होता है। हम मैं से कोई भी कैंप के अंदर नहीं गया सब उस पहले अहसास को जीवंत अनुभव करना चाह रहे थे । बर्फ बारी की खूबसूरती को जीवंत अनुभव करने के लिये बर्फ के छल्लो के नीचे तो जाना ही पड़ता है । हम सब जैसे अपने बचपन मैं वापस आ गए थे । सब कोई मस्त मगन था । इसी बीच मैने गाना प्ले किया "हम तुमसे ना कुछ कह पाए" ज़िद्दी मूवी का । अब लाइट सांग मैं और भी आनंद दुगना हो गया ।वहा केवल तीन ग्रुप आए हुए थे । एक हमारा पांच बन्दों का , दूसरा चार लड़के और एक लड़की का और तीसरा ग्रुप चार लड़को का था । वे सब भी फोटो सेशन मैं मस्त थे । जो चार लड़का वाला ग्रुप था उसमें एक हीरो धनुष की तरह दिखने वाला लड़का था जिसने अपनी बनियान तक उतार दी थी । खैर अपूण को क्या, बहादुरी और बेवकूफी मैं अंतर पता है इसलिए हमने ऐसा दीवानापन नहीं किया । अब हम वही पास की शॉप मैं गये वह परांठा मेग्गी खायी और ट्रैकिंग शूज रेंट पर लिये और अब अपने पायलट राम को बोले जेट तैयार करने को और हम सब अपने बैकपैक लेके गाडी मैं बैठ गए बनियाकुण्ड से चोपता जाने के लिये ।बर्फ़बारी लगातार हो रही थी । रोड काफी स्लिपरी हो गयी थी गाडी एक साइड घिसट रही थी और आगे जाने पर और खतरनाक होते जा रहा था लकिन पायलट राम एक १९ वर्षीय युवक था वो पूरी कोसिस कर रहा था जितना आगे तक गाडी ले जा सके बाद मैं हम सब ने उसको बोलै की गाडी बनियाकुण्ड मैं ही पार्क कर दे और हमारे साथ चल क्यंकि उसका बेहवियर बहुत ही अच्छा था हम उसे छोटे भाई की तरह ट्रीट कर रहे थे साथ मैं खाना खिलाना अपने ही कैंप मैं सुलाना और उसने भी हम सब को बड़े भाई की तरह ट्रीट किया । राम हमारे साथ चल दिया ।अब कहानी यहाँ से बिगड़नी सुरु होती है जो बहुत ही रोमांचक है जिसमे हम बाल बाल बचे जिसका वर्तान्त मैं भाग चार मैं प्रस्तुत करूँगा । धन्यवाद ।