Thursday, 9 September 2021

मेरी अविस्मरणय चोपता यात्रा सर्दियों में-भाग-4

मेरी अविस्मरणय चोपता यात्रा सर्दियों में-भाग-4

हम सब ने प्लान बनाया हुआ था की सुबह सुबह अगले दिन पांच बजे ट्रैक सुरु कर देंगे तुंगनाथ मंदिर के  लिये लकिन सब की नींद खुली सुबह सात  बजे वो भी सब एक दूसरे को  शोचलाय जो कैंप का साथ ही अटैच्ड था  जाने का  आदेश दे रहे थे तांकि थोड़ी देरऔर बिस्तर मैं लेटे रहे क्यंकि सुबह सुबह बहुत ठण्ड थी । इसी बात पर मुझे एक शेर याद आ गया जो पर्फेक्ट्ली यहाँ पर फिट बैठता है 
"बड़ी बेवफ़ा हो जाती है ग़ालिब
ये घड़ी भी सर्दियों में,
5 मिनट और सोने की सोचो तो, 
30 मिनट आगे बढ़ जाती है"

 फिर मैने ही अपनी संकल्प शक्ति का इस्तेमाल किया और झट से रजाई कम्बल से बाहरआ गया । अब मैं गरम पानी के इंतजाम के लिये बाहर निकला कैंप से। वाह क्या नजारा था चारो तरफ वो  दर्श्य बड़ा ही मनमोहक था  ।  चारो तरफ बर्फ ही बर्फ जैसे हिमयुग आ गया हो । सब अभी सो रहे थे कोई भी नहीं जागा हुआ था । मैं केयर टेकर वाले कैंप की तरफ गया वो सब भी सो रहे थे तो मैं वापिस अपने कैंप मैं आगया और शौच के लिये बैठ गया । अब बारी आती है पानी से धोने की तो पानी जो रात का रखा हुआ था वो जमा हुआ था  ठोस बर्फ मैं अब अब जैसे तैसे मैने पानी से अपनी नितम्ब धोये बोले तो अभी तक सबसे कम पानी नीतिमबो को धोने मैने  वही यूज़  किया था ठंडा जो इतना था । फिर एक एक करके सब अपना नंबर लगाते रहे तथा इस शीत परीक्षा से गुजरते रहे । शौच से निवर्थ होने के बाद वे सब फिर बिस्तरों के अंदर घुस गए और चाय का इन्तजार करने लगे । मैं बाहर प्रकर्ति की ख़ूबसूरती को निहारने मैं व्यस्त था क्यंकि मैने पहले इतनी बर्फ नहीं देखि थी । दरशल मुजमे जो ऑफबीट जगहों मैं घूमने का कीड़ा जो जागा वो चोपता टूर से स्टार्ट हुआ था खैर अब तो चोपता काफी प्रसिद हो गए है । इससे पहले मैं मुसूरी, नैनीताल, हरिद्वार, ऋषिकेश, चम्बा,वैष्णो देवी,रानीखेत, आदि भीड़ भाड़ वाली जगहों पर ही गया था । इतने मैं हमारी चाय आ गयी और सबने चाय की चुस्किया मारनी सुरु कर दी । फिर सब बाहर आ गये फिर अचानक बर्फ बारी गिरनी सुरु हो गयी ।  सबकी खुसी का कोई ठिकाना नहीं रहा सब मन्त्र मुगद हो  गये क्यंकि सबका वो पहले अनुभव था बर्फ बारी का । 
प्रकर्ति ने हमारी सुन ली थी । मेरे ख्याल से बर्फ बारी का पहला अनुभव एक पहले प्यार जैसा होता है। हम मैं से कोई भी कैंप के अंदर नहीं गया सब उस पहले अहसास को जीवंत अनुभव करना चाह रहे थे । बर्फ बारी की खूबसूरती को जीवंत अनुभव करने के लिये  बर्फ के छल्लो के नीचे तो जाना ही पड़ता है । हम सब जैसे अपने बचपन मैं वापस आ गए थे ।  सब कोई मस्त मगन था । इसी बीच मैने गाना प्ले किया "हम तुमसे ना कुछ कह पाए" ज़िद्दी मूवी का । अब लाइट सांग मैं और भी आनंद दुगना हो गया ।वहा केवल तीन ग्रुप आए हुए थे । एक हमारा पांच बन्दों का , दूसरा चार लड़के और एक लड़की का और तीसरा ग्रुप चार लड़को  का था ।  वे सब भी फोटो सेशन मैं मस्त थे । जो चार लड़का वाला ग्रुप था उसमें एक हीरो धनुष की तरह दिखने वाला लड़का था जिसने अपनी बनियान तक उतार दी थी । खैर अपूण को क्या, बहादुरी और बेवकूफी मैं अंतर पता है इसलिए हमने ऐसा दीवानापन नहीं किया । अब हम वही पास की शॉप मैं गये वह परांठा मेग्गी खायी और ट्रैकिंग शूज रेंट पर लिये और अब अपने पायलट राम को बोले जेट तैयार करने को और हम सब अपने बैकपैक लेके गाडी मैं बैठ गए बनियाकुण्ड से चोपता जाने के लिये ।बर्फ़बारी लगातार हो रही थी । रोड काफी स्लिपरी हो गयी थी गाडी एक साइड घिसट रही थी और आगे जाने पर और खतरनाक होते जा रहा था लकिन पायलट राम एक १९ वर्षीय युवक था वो पूरी कोसिस कर रहा था जितना आगे तक गाडी ले जा सके बाद मैं हम सब ने उसको बोलै की गाडी बनियाकुण्ड मैं ही पार्क कर दे और हमारे साथ चल क्यंकि उसका बेहवियर बहुत ही अच्छा था हम उसे छोटे भाई की तरह ट्रीट कर रहे थे साथ मैं खाना खिलाना अपने ही कैंप मैं सुलाना और उसने भी हम सब को बड़े भाई की तरह ट्रीट किया । राम हमारे साथ चल दिया ।अब कहानी यहाँ से बिगड़नी सुरु होती है  जो बहुत ही रोमांचक है जिसमे हम बाल बाल बचे जिसका वर्तान्त मैं भाग चार मैं प्रस्तुत करूँगा । धन्यवाद ।    

Tuesday, 28 January 2020

मेरी अविस्मरणय चोपता यात्रा सर्दियों में-भाग-3

अब हम सब वापस अपने कैंप(बनियाकुण्ड) आ गये। हम सब ने पहले अपनी अपनी सोने की जगह पर कब्ज़ा करना सुरु कर दिया । ज्यादातर कोने वाला बिस्तर ही कब्ज़ा करना चाह रहे थे लकिन यहाँ पर पहले आओ और पहले पाओ वाला नियम लागू था। सरदार(अमित )😊 को अलग बेड दिया गया।हमारे कैंप के चारो और बर्फ ही बर्फ थी और यह हम सब का पहला अनुभव था बर्फ में कैंपिंग का। सबको भूख लग रही थी तो हमने कैंप वाले को खाने का आर्डर दे दिया जो बहुत ही सिंपल और स्वादिष्ट था एक दम पहाड़ी टेस्ट । हमने अपनी अंडे की ट्रे भी उसी को दे दी अंडा करी बनवाने के लिये।अब जब तक खाना तैयार होता तब तक हमने मैगी बनाने की सोची क्यंकि भूख के मारे पेट में सबके चूहे खुद रहे थे।तो हमने अपना गैस निकाला और १० पैकेट मेग्गी के । अब हमारा शेफ( साहिल ) अपनी पूरी लह में था क्यंकि वो मेग्गी एक्सपर्ट है और जब भी उसको मेग्गी बनाने के लिये बोलो तो उसका सीना चौड़ा हो जाता है और ऐसी फॉर्म में आता है जैसे संजीव कपूर को मेग्गी बनानी इसी ने सिखाई होगी। प्याज टमाटर, हरी मिर्च,और भी पता नहीं कौन कौन से मसाले साहिल ने यूज़ किये साथ ही साथ  कैंप वाले ने हमारे लिये अलग बोनफिरे का इंतजाम कर दिया ।वहां एक ग्रुप और था जिसमे ३-४ लड़के और एक लड़की थी ।में उनके ग्रुप में गया और उनसे वार्तालाप करी तो पता चला की वो तुंगनाथ ट्रैक से आज ही वापस आये है लकिन वो आधे रास्ते से ही वापस आ गये क्यंकि बर्फ कमर  थक थी वहां। अब मेरा मन छोटा हो गया था यह सुनकर लकिन मेरा विश्वास था की में कमर तक बर्फ में भी ट्रैक करूँगा लकिन पहुंचना तुंगनाथ है हर हालत में😁 । हम सब गोल घेरा बना के बैठे हुये थे बीच में बोनफिरे और गैस जिसमे मेग्गी बनायीं जा रही थी। में साहिल का उस समय कुकिंग अस्सिस्टेंट बना हुआ था क्यूंकि दुसरो को खिलाने का भी अलग ही आनंद है। अब मेग्गी तैयार हो चुकी थी और सबके मुँह में मेग्गी को देखकर पानी आ रहा था। अब सब को अलग अलग दोने में मेग्गी परोसी गयी। उस समय सबका मुँह देख़ने लायक था ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे समुन्दर मंथन से यह मेग्गी निकली हो अमृत के समान। चारो और हम गोल सर्किल में बैठे हुये मेग्गी का आनंद ले रहे थे बीच में बोनफिरे और हमारा ब्लूटूथ स्पीकर जिसपे गाना चल रहा था(आज मौसम बेईमान है है बड़ा) ठण्ड भी काफी हो रही थी सबकी नाको से पानी बहने लगा था जिसके कारण कुछ सूरा पान करने वालो नै मेग्गी को चकना की तरह यूज़ किया और बोले की यह ज़िन्दगी का सबसे बढ़िया चकना लग रहा है आज😁।वहाँ पर एक वीडियो शूट भी हुआ(वीडियो लिंक नीचे दिया गया है)  जिसमे सबने अपना अपना अनुभव साझा किया उस वर्तमान पल का।  इसके बाद सब अपने अपने भुतहा अनुभव साझा करने लगे तभी मैने सबको रोक दिया की तुम वो शमशान  घाट वाली बात भूल गये क्या, अभी आ जाएंगी सारी नकारात्मक ऊर्जाय। सभी अवाक रहे गये की हा यह सही कह रहा है इसके बाद सबने उस ख़ूबसूरत माहोल मैं बेढंगा नृत्य किया 😁।सब के सब उस अविस्मरणय पल के साक्षी बन रहे थे। अब मैने सबको चेताया की हमे सुबह सुबह तुंगनाथ के लिये भी निकलना है ।  सब अब थक चुके थे और सब अपने अपने बिस्तर में पोजीशन ले चुके थे । बिस्तर में चार पांच लेयर की कम्बल और एक रजाई में सर्दी में भी गर्मी का अहसास हो रहा था।वहां प्रकाश नहीं था अब हलकी सी लालटेन की रौशनी में सब बिस्तर में लेटे लेटे एक दूसरे की तफरी ले रहे थे और सब खूब हंस रहे थे। सबसे ज्यादा तफरी नंदू की ली जा रही थी क्यंकि वो सीधा और साफ़ इंसान था और मजाक का पलटवार भी नहीं करता था ।सब खूब हंस रहे थे और फिर पता ही नहीं चला की नींद ने कब सबको अपने गहन आगोश में ले लिया।मेरी नीदं बहुत ही सेंसटिव है अगर हल्का सी भी आवाज आये तो मेरी नींद तुरंत खुल जाती है। रात में मेरी आँख खुली समय रहा होगा तक़रीबन २-३ बजे का मैंने कैंप के ऊपर टप टप की आवाज सुनी और में समझ गया की स्नोफॉल(बर्फ का गिरना )हो रहा है और में बिस्तर से बाहरनिकल गया क्यंकि मैंने स्नोफॉल नहीं देखा था जीवन में तो में यह पल कैसे मिस कर सकता था।मैने कैंप से  बाहर आकर देखा तो में अवाक् रह गया उस खूबसूरत रात्रि को देखकर।  चारो और सन्नाटा, चारो और सफेद बर्फ ही बर्फ। बर्फ गिर रही थी सितारों की तरह, बहुत ही शान्ति और सुंदरता थी उस पल में और ऐसा लग रहा था की यह पल देख्ते देख्ते कही में enlightened ना हो जाऊं । अचानक में होश में आया और अपनी हीरोपंती और कवी ह्रदय से बाहर निकलकर वापस अपने बिस्तर में लेट गया और उस पल को महसूस करते हुये नींद के गहन आगोश में समां गया। बाकी वर्तान्त के लिये मिलते है पार्ट-४ में-

        




Friday, 24 January 2020

मेरी अविस्मरणय चोपता यात्रा सर्दियों में-भाग-2

हम सब ड्राइवर के कहने से वहां से तुरंत निकल गये। हमारे ग्रुप में मैं ही ऐसा सदस्य हूँ  जो रात के सफर में सोता नहीं है और पहाड़ो की सुबह की सुंदरता को भी मैं अपने आँखों के कैमरे से मिस नहीं करता। हमारे पायलट राम को नींद महसूस हुई और उसने गाडी को ज्वाल्पा देवी(पौढ़ी गढ़वाल) के सामने पार्क कर दिया। हम सब गाडी में बैठने से पहले ही ड्राइवर को निर्देश दे देते है कि जहा पर भी तुझे नींद फील होये तो बता देना और रेस्ट कर लेना। राम वही गाडी पार्क करके सो गया।सुबह के तक़रीबन ६ से ७ बजे का वक़्त रहा होगा अब बाकी के घुम्मकड़ भी उठ गये थे जो बोनफिरे के बाद सो गये थे।सबसे पहले मुझमे फ्रेश होने का कीड़ा जागा और उसके बाद एक एक करके सबका 😄
वहां पर जो शौचालय बना हुआ था जो व्यस्त चल रहा था और प्रेशर सबका बहुत तेज आ रहा था तो हम सब ने  साइड में नदी के पास जाने का रास्ता देखा और नीचे कि और निकल पड़े। सब नदी के किनारे अपनी अपनी पोजीशन ले चुके थे कि तभी अमित बोला जो मेरे समीप बैठा था कि यार इस कुत्ते  ने मुँह में क्या ले रखा है।मैने वहां कुछ अधजले शव देखे । एक एक करके सबको समझ आ गया कि हमने यह बहुत बड़ी गलती कर दी है अर्थार्थ वो जगह शमशान घाट थी और शमशान घाट भगवान शिव का निवास माना जाता है और हम हम वापस ऊपर कि और सड़क पर आ गए। वहां पर सबसे पहले मैने धारा( पहाड़ो से बहता हुआ प्राकर्तिक पानी ) के पानी से मुँह धोया जो में हर पर्वतीय यात्रा में करता हूँ जो मुझे बहुत अच्छा लगता है। उसके बाद हम सब ने चाय और फैन आदि खाये तब तक ड्राइवर राम कि भी नींद खुल गयी। एक चाय उसके लिये भी बोली गयी फिर अमित बोला एक चाय मेरी और बना देना फिर एक एक करके सारो नै चाय का दुबारा आर्डर दे दिया 😄। सब चाय पीने के बाद निकल पड़े स्विट्ज़रलैंड(चोपता) कि और। हम उसी घटना कि चर्चा करते रहे फिर हम सब नै उस घटना को नजरअंदाज किया क्यूंकि हम अपनी यात्रा को एन्जॉय करना चाहते थे। हमने ११ बजे के आस पास छोले परांठा खाये (श्रीनगर रोड, पौड़ी गढ़वाल) (फोटो भी डाला गया है)अब हम नॉन स्टॉप प्रकर्ति को निहारते हुये चोपता कि और बढ़ते जा रहे थे। हम तक़रीबन पांच बजे उखीमठ से आगे पहुँच चुके थे अब सफर बहुत ही खूबसूरत लग रहा था ऐसा लग रहा था कि पूरे रास्ते पर बस हम ही चल रहे है।मेरे साथ एक समस्या है जिससे मेरे साथी परेशान होते है हर पर्वर्तीय यात्रा में और वो यह है की मैं हिल्स मैं मिरर खोलके रखता हूँ ,मैं पहाड़ो की हवा का कवि की भाषा मैं वर्णन नहीं कर सकता। (आप इस नोकझोक का वीडियो पेज के अंत मैं दिये गये यूट्यूब लिंक पर क्लिक करके भी देख सकते हो-link-5) बरबस ही हम सब प्रकर्ति के सौन्दर्य में खो गये। वास्तव में कुछ साल पहले तक चोपता को कोई जानता नहीं था लकिन वर्तमान मैं हम जैसे खोजियो के यहाँ कि पिक्स एंड वीडियोस अपलोड करने के बाद अब यह स्थान भी काफी पॉपुलर हो रहा है। जनुअरी कि वो धुप मेरी यादगार धुप है, धुप बहुत ही आनंदयक लग रही थी । लाइट म्यूजिक सांग सुनते हुये सफर का मजा दुगना हुआ जा  रहा था (वीडियो लिंक भी दिया गया है-link-1-4)हमने एक जगह पर गाडी रोककर फोटो सेशन किया, हम सब बहुत ही खुश थे ,दिल्ली एनसीआर कि व्यस्त लाइफ को पीछे छोड़कर कर हम वर्तमान मैं हर पल को जी रहे थे। वास्तब मे हम स्नो देखने के लिये सब  व्याकुल हो रहे थे जो की हमे अब तक रास्ते पर नहीं मिली थी और लग रहा था की शायद नहीं मिलेगी अचानक हमे सो ग्राम स्नो के दर्शन हुए और हम सब चिल्ला उठे दस रुपय वसुल हूये फिर आगै जाकर दो सो ग्राम बर्फ देखीं तो सब बोल पड़े बीस रुपय वसुल हुए ,फिर बीस से पचास, पचास से सौ, फिर हजार और धीरे धीरे बर्फ बढती गयी और अचानक हम पहुंच चुके थे स्वीट्ज़रलैंड ऑफ़ इंडिया मे जो बर्फ मे बहुत ही खूबसूरत लग रहा था(link-2-3)हम सब आश्चयचकित थे की एका एक इतनी बर्फ और पीछे के पहाड़ी रास्तो पर बर्फ का नामो निशान नहीं था।  अब शाम हो चुकी थी और धीरे धीरे अँधेरा पैर पसार रहा था और हम अपने रात को ठहरने का ठिकाना तलाश रहे थे। हमारे रास्ते मैं बनियाकुण्ड आया और वहां हमने कुछ कैंप देखे अब  हमारे ग्रुप के तीन सदस्य(अमित, नंदू, कुलदीप)  एक दिशा में गये और साहिल और मैं अलग दिशा में गये कैंप की पूछताछ के लिये। वापस आकर जब दोनों टुकड़ियों ने अपना आउटपुट रखा तो जिस कैंप में साहिल और मैं गये थे वो फाइनल कर लिया। स्टे काफी बजट में था और खाना भी। फिर भी हमने कैंप बुक नहीं किया कि कही चोपता में इससे भी बढ़िया मिल जाये तोइसको हमने बैकअप रखा और हम चोपता कि और निकल गये । चोपता सचमुच बहुत ही खूसूरत लग रहा था उस समय, मैने तुंगनाथ महादेव कीऔर सर झुकाया(प्रवेश द्वार) हमे वहां पर स्टे नहीं मिला कियुकि सब आलरेडी बूकेड था। वहां पर हम सब ने ताज़ी ताज़ी गिरी हुई बर्फ से बहुत खेला, हम सब दुनियादारी भूल वर्तमान के हर पल का आनंद ले रहे थे कि तभी मैने सभी को चेताया कि रात हो गयी है और हमे वापस बनियाकुण्ड भी जाना है स्टे के लिये,वो भी कही बुक ना हो गया हो।फिर हम सब वापस बनियाकुण्ड कि और रवाना हो गये।रात का वो वापसी का सफर मुझे आज भी याद है वो हसी रात वो सफर ।अब हमअपने कैंप CHOPTA MEADOWS HERITAGE  CAMPS(बनियाकुण्ड) में डेरा डाल चुके थे और अब बारी थी रात को यादगार बनाने की जिसका वर्तान्त में भाग तीन में साझा करूँगा। आशा करता हु आपको यह भाग भी अच्छा लगा होगा।  धन्यवाद।.....(क्रमश:) --भाग एक पड़ने के लिये नीचे लिंक पर क्लिक करे- 
https://pawanraturi.blogspot.com/2020/01/1.html 



                                 हमारा सिग्नेचर पोज़ 
                     इस रास्ते पर बस हम ही हम है और दूर दूर तक कोई नहीं
                                           हा मुझे तुम से प्यार है प्यार है  
                             हा मुझे तुम से प्यार है प्यार है  
                                                    कुलदीप छोले परांठा खाते हुये
                                                             मस्ती टाइम
                                   बर्फ की अभी तो शुरुवात है 
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Monday, 20 January 2020

मेरी अविस्मरणय चोपता यात्रा सर्दियों में-भाग-1

दोस्तों मैं आप सब लोगो से अपनी  चोपता यात्रा को आप सब के साथ साझा करना चाहूंगा और आशा करता हु की आप सब मेरी लेखन त्रुटियो को नजरअंदाज करंगे और यात्रा वर्णन का लुतफ उठाएंगे । कहानी सुरु होती है हमारे चोपता टूर 2019 जनुअरी की। हमारे ट्रिप मैं सबसे पहला काम होता है जगह चुनने का जिसकी जिम्मेदारी मुझ पर होती है और में अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाता हु। हमारी डेस्टिनेशन होती ह प्लेस जहा मनाली , मसूरी ,नैनीताल की तरह भीड़ भाड़ ना हो ताकि हम प्रकर्ति के बीच में शान्ति के पल गुजार सके।काफी खोज के बाद मैने डेस्टिनेशन चुनी चोपता जिसे मिनी स्विट्ज़रलैंड ऑफ़ इंडिया भी कहा जाता है।अब बारी आती है बन्दों को ट्रिप के लिये राजी करने की वो भी जो एक नंबर के घुमक्कड़ हो तो सबसे पहला घुमक्कड़ मिला साहिल जो इंडियन  overseas बैंक में जॉब करता है तो हम दोनों ही घुम्मकड़ों को ढूंढ़ते है अपने ट्रिप के लिये जैसा आप लोग जानते है ही की घुम्मकड़ी में कितने सारे एक्सक्यूसेस होता है जैसे ,छुट्टी नहीं मिल रही है , पैसा नहीं है बला बला। तो आखिरकार मैने अपने अपने परम मित्र कुलदीप सैनी को तैयार किया जो की मेरे साथ की गयी कई यात्राओं के साक्षी रहा है और जो एक नेटवर्क इंजीनियर है। दूसरा साहिल नै अपने ही बैंक के परम मित्र अमित कुमार जो की अस्सिस्टेंट मैनेजर है बैंक में । और अब अमित नै अपने ही प्रिय भाई नंदू  जो की अमित की मामा का  लड़का है उसको रेडी कर लिया । अब हम पांच फाइनल हो गये -साहिल,अमित ,कुलदीप,नंदू और में पवन. अब बारी थी गाडी बुक करने की अकॉर्डिंग कितने घुम्मकड़ जा रहे है तो मैंने इन्नोवा बुक करा ली १३/KM जिसने टोल टैक्स ,ड्राइवर अलाउंस, पार्किंग भी हमारा ही था। मैने और साहिल नै ट्रिप की पूरी तयारी कर ली थी जैसे मैगी, एग्स,बोनफिरे के लिये लकडिया ,मिनी गैस ,२० लीटर वाली वाटर बोतल,उलटी सरदर्द बुखार दस्त की दवाइया आदि आदि।मैने व्हाट्सप पर बैकपैकर्स नाम के ग्रुप भी बनाया हुआ है जिसमे में ट्रिप मेंबर्स को ऐड करता हु। उस ग्रुप में ट्रिप से सम्बंधित सभी सूचनाये और निर्देश शेयर करता हु। यहाँ पर में अपने पायलट राम के बारे में बताना चाहूंगा जो की एक २२-२३ साल का युवक है और हम उसे अपने छोटे भाई की तरह ही ट्रीट करते है। राम भी हमारी की गयी कई यात्राओं का साक्षी  है क्यंकि हम उसे ही प्रेफर करते है। उसको भी हमारे साथ बहुत मजा आता है। हमारी यात्रा दिन वेडनेसडे इवनिंग को सुरु होती है तो सबसे पहले में और साहिल ऑफिस से हाफ डे लेकर हमने  कुछ पेंडिंग वर्क पूरे किये और। में साहिल के रूम पर ही पहुंच गया था अपना बैकपैक लैके।सबसे पहले मेरा और साहिल का पिकअप  हुआ अशोक विहार गुडगाँव से उसके बाद कुलदीप का  इफको चौक से।उसके बाद अमित और नंदू का । अब हम सब निकल पड़े एक अनजान सफर की और जो सबके लिये नया था।सर्दी काफी थी और हमारी कार को ड्राइवर राम एक दम कॅप्टन अभिनन्दन की तरह अपना जेट उड़ा रहा था.सबसे पहले लेग पुल्लिंग गानो की वजह से हुई ।
साहिल: अबे क्या पवन तू यह 90 के सांग्स प्ले करता रहता है
पवन : अबे क्या साहिल तू यह धूम धड़ाम वाले सांग प्ले करता है
अब बारी आती है कुलदीप की प्लेलिस्ट की
साहिल : अबे क्या कुलदीप तू तो कुमार शानू को पीछा ही नहीं छोड़ता
अब बारी आती है अमित की प्लेलिस्ट की
हम सब, अरे क्या अमित भाई राधे राधे तो मॉर्निंग में अच्छा लगता है।
अंत में मैंने पहले से भापि गयी समस्या का अंत करने के लिये अपनी wynk म्यूजिक app में एक ट्रैवलिंग नाम की एक प्लेलिस्ट बनायीं हुई थी जिसमे मिक्स सांग्स थे ९० के, लता के,किशोर के,पंजाबी सांग्स, लेटेस्ट बॉलीवुड सांग्स, भक्ति सांग्स आदि आदि.हमने अपना डिनर LUCKY SHUDH BHOJNALAYA MRT ROAD पर किया और यहाँ एक बुरा हादशा हो गया। कुलदीप जब इस ढाबे का वीडियो बना रहा था तो मेरा हाथ उसके हाथ से टकरा गया और उसका मोबाइल नीचे जा गिरा । अब कुलदीप का मुँह देख़ने लायक था लकिन तभी सरदार( अमित ) नै नया रूल निकाल दिया की ट्रिप में मोबाइल का इंस्युरेन्स रहेगा और सभी को शेयर करना पड़ेगा अब कुलदीप की जान में जान आ गयी।
हम रात को 02:41AM तक लैंसडौन के समीप पहाड़ो में  पहंच गये थे। सर्द एकांत काली रात थी और मैने गाडी रुकवा ली वही पर। बोनफिरे कई लिये मुझे लोकेशन अच्छा लगा । ये एक्टिविटी हम सब के लिये थ्रिलिंग वाली थी। हमने गाडी से लकडिया और डीज़ल निकाल लिया और ब्लूटूथ स्पीकर भी । अब बोनफिरे रेडी था और कुमार शानू के म्यूजिक की धुन भी। हमारे ग्रुप  में से कुछ मेंबर्स  सुट्टा GOLDFLAKE और पैक के शौकीन है(नाम नहीं लूंगा गोपनीयता के लिये 😀) उनको काफी ठण्ड लग रही थी तो उन्होने ओल्ड मोंक और रम के दो दो पैक और सुट्टा गोल्ड़फ्लैके मारा और फिर डांस सुरु कर दिया।हवा साय साय आवाज करती हुई चल रही थी और नीचे नदी की बहने की आवाज आ रही थी। कही दूर कोई कुत्ता भोके जा रहा था जिसकी आवाज आप वीडियो में सुन सकते हो  पर हम डार्क नाईट की वजह से उसे नहीं देख पा रहे थे हम सब उस अविस्मरणीय रात के साक्षी बन रहे थे की तभी हमारे पायलट राम के पास फ़ोन आया।
राम: सर आज तक मेरी मम्मी का  इतने बजे फ़ोन नहीं आया वो बोली की तू जहा भी है वह से निकल जा ( उनको शायद बुरा सपना दिखा) ।अक्सर पहाड़ो में रात को नदी के किनारे ऊपरी हवा लगने के ज्यादा चांस होते है.
 हम सब वहा से निकल पड़े तुरंत।
मुझे आप सब लोगो के कमैंट्स का इन्तजार रहेगा। यह मेरे लेखन का पहले प्रयास है और मैंने पूरी कोशिस की है की आप सब को इस यात्रा वर्तान्त को जीवंत अनुभव करा  सको। अगर आप सब लोगो को मेरा यह प्रयास अच्छा लगा तो में भाग दो बहुत जल्द आप लोगो के समक्ष रखूंगा ।धन्यवाद ।...............(क्रमश:)

चरित्र चित्रण :- पवन(मैं):-डेस्टिनेशन चूज़र , ट्रेवल प्लानर, क्रिएटिव आइडियाज इम्प्लीमेंटर।
कुलदीप:-डांसर, एंकर 
साहिल:- अस्सिस्टेंट ट्रेवल प्लानर,अस्सिस्टें क्रिएटिव आइडियाज      इम्प्लीमेंटर,बेस्ट मैगी शेफ।
अमित:- कम  बोलने वाला, सबका चहता,फूडी,हर परिस्तितिओ मैं ढलने वाला अक्सर हम उन्हे सरदार बुलाते है।
नंदू :-कम  बोलने वाला, सबका चहता, बहुत सीधा साफ़ इंसान।
राम:- आज्ञाकारी  शिष्ट पायलट 

        (Part-2)


                       हमारी हर यात्रा का साथी यह गैस और कुकर 
यही पर हमने डिनर किया था और यही पर कुलदीप की मोबाइल स्क्रीन टूटी थी।
                                                          BONEFIRE
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