Monday, 20 January 2020

मेरी अविस्मरणय चोपता यात्रा सर्दियों में-भाग-1

दोस्तों मैं आप सब लोगो से अपनी  चोपता यात्रा को आप सब के साथ साझा करना चाहूंगा और आशा करता हु की आप सब मेरी लेखन त्रुटियो को नजरअंदाज करंगे और यात्रा वर्णन का लुतफ उठाएंगे । कहानी सुरु होती है हमारे चोपता टूर 2019 जनुअरी की। हमारे ट्रिप मैं सबसे पहला काम होता है जगह चुनने का जिसकी जिम्मेदारी मुझ पर होती है और में अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाता हु। हमारी डेस्टिनेशन होती ह प्लेस जहा मनाली , मसूरी ,नैनीताल की तरह भीड़ भाड़ ना हो ताकि हम प्रकर्ति के बीच में शान्ति के पल गुजार सके।काफी खोज के बाद मैने डेस्टिनेशन चुनी चोपता जिसे मिनी स्विट्ज़रलैंड ऑफ़ इंडिया भी कहा जाता है।अब बारी आती है बन्दों को ट्रिप के लिये राजी करने की वो भी जो एक नंबर के घुमक्कड़ हो तो सबसे पहला घुमक्कड़ मिला साहिल जो इंडियन  overseas बैंक में जॉब करता है तो हम दोनों ही घुम्मकड़ों को ढूंढ़ते है अपने ट्रिप के लिये जैसा आप लोग जानते है ही की घुम्मकड़ी में कितने सारे एक्सक्यूसेस होता है जैसे ,छुट्टी नहीं मिल रही है , पैसा नहीं है बला बला। तो आखिरकार मैने अपने अपने परम मित्र कुलदीप सैनी को तैयार किया जो की मेरे साथ की गयी कई यात्राओं के साक्षी रहा है और जो एक नेटवर्क इंजीनियर है। दूसरा साहिल नै अपने ही बैंक के परम मित्र अमित कुमार जो की अस्सिस्टेंट मैनेजर है बैंक में । और अब अमित नै अपने ही प्रिय भाई नंदू  जो की अमित की मामा का  लड़का है उसको रेडी कर लिया । अब हम पांच फाइनल हो गये -साहिल,अमित ,कुलदीप,नंदू और में पवन. अब बारी थी गाडी बुक करने की अकॉर्डिंग कितने घुम्मकड़ जा रहे है तो मैंने इन्नोवा बुक करा ली १३/KM जिसने टोल टैक्स ,ड्राइवर अलाउंस, पार्किंग भी हमारा ही था। मैने और साहिल नै ट्रिप की पूरी तयारी कर ली थी जैसे मैगी, एग्स,बोनफिरे के लिये लकडिया ,मिनी गैस ,२० लीटर वाली वाटर बोतल,उलटी सरदर्द बुखार दस्त की दवाइया आदि आदि।मैने व्हाट्सप पर बैकपैकर्स नाम के ग्रुप भी बनाया हुआ है जिसमे में ट्रिप मेंबर्स को ऐड करता हु। उस ग्रुप में ट्रिप से सम्बंधित सभी सूचनाये और निर्देश शेयर करता हु। यहाँ पर में अपने पायलट राम के बारे में बताना चाहूंगा जो की एक २२-२३ साल का युवक है और हम उसे अपने छोटे भाई की तरह ही ट्रीट करते है। राम भी हमारी की गयी कई यात्राओं का साक्षी  है क्यंकि हम उसे ही प्रेफर करते है। उसको भी हमारे साथ बहुत मजा आता है। हमारी यात्रा दिन वेडनेसडे इवनिंग को सुरु होती है तो सबसे पहले में और साहिल ऑफिस से हाफ डे लेकर हमने  कुछ पेंडिंग वर्क पूरे किये और। में साहिल के रूम पर ही पहुंच गया था अपना बैकपैक लैके।सबसे पहले मेरा और साहिल का पिकअप  हुआ अशोक विहार गुडगाँव से उसके बाद कुलदीप का  इफको चौक से।उसके बाद अमित और नंदू का । अब हम सब निकल पड़े एक अनजान सफर की और जो सबके लिये नया था।सर्दी काफी थी और हमारी कार को ड्राइवर राम एक दम कॅप्टन अभिनन्दन की तरह अपना जेट उड़ा रहा था.सबसे पहले लेग पुल्लिंग गानो की वजह से हुई ।
साहिल: अबे क्या पवन तू यह 90 के सांग्स प्ले करता रहता है
पवन : अबे क्या साहिल तू यह धूम धड़ाम वाले सांग प्ले करता है
अब बारी आती है कुलदीप की प्लेलिस्ट की
साहिल : अबे क्या कुलदीप तू तो कुमार शानू को पीछा ही नहीं छोड़ता
अब बारी आती है अमित की प्लेलिस्ट की
हम सब, अरे क्या अमित भाई राधे राधे तो मॉर्निंग में अच्छा लगता है।
अंत में मैंने पहले से भापि गयी समस्या का अंत करने के लिये अपनी wynk म्यूजिक app में एक ट्रैवलिंग नाम की एक प्लेलिस्ट बनायीं हुई थी जिसमे मिक्स सांग्स थे ९० के, लता के,किशोर के,पंजाबी सांग्स, लेटेस्ट बॉलीवुड सांग्स, भक्ति सांग्स आदि आदि.हमने अपना डिनर LUCKY SHUDH BHOJNALAYA MRT ROAD पर किया और यहाँ एक बुरा हादशा हो गया। कुलदीप जब इस ढाबे का वीडियो बना रहा था तो मेरा हाथ उसके हाथ से टकरा गया और उसका मोबाइल नीचे जा गिरा । अब कुलदीप का मुँह देख़ने लायक था लकिन तभी सरदार( अमित ) नै नया रूल निकाल दिया की ट्रिप में मोबाइल का इंस्युरेन्स रहेगा और सभी को शेयर करना पड़ेगा अब कुलदीप की जान में जान आ गयी।
हम रात को 02:41AM तक लैंसडौन के समीप पहाड़ो में  पहंच गये थे। सर्द एकांत काली रात थी और मैने गाडी रुकवा ली वही पर। बोनफिरे कई लिये मुझे लोकेशन अच्छा लगा । ये एक्टिविटी हम सब के लिये थ्रिलिंग वाली थी। हमने गाडी से लकडिया और डीज़ल निकाल लिया और ब्लूटूथ स्पीकर भी । अब बोनफिरे रेडी था और कुमार शानू के म्यूजिक की धुन भी। हमारे ग्रुप  में से कुछ मेंबर्स  सुट्टा GOLDFLAKE और पैक के शौकीन है(नाम नहीं लूंगा गोपनीयता के लिये 😀) उनको काफी ठण्ड लग रही थी तो उन्होने ओल्ड मोंक और रम के दो दो पैक और सुट्टा गोल्ड़फ्लैके मारा और फिर डांस सुरु कर दिया।हवा साय साय आवाज करती हुई चल रही थी और नीचे नदी की बहने की आवाज आ रही थी। कही दूर कोई कुत्ता भोके जा रहा था जिसकी आवाज आप वीडियो में सुन सकते हो  पर हम डार्क नाईट की वजह से उसे नहीं देख पा रहे थे हम सब उस अविस्मरणीय रात के साक्षी बन रहे थे की तभी हमारे पायलट राम के पास फ़ोन आया।
राम: सर आज तक मेरी मम्मी का  इतने बजे फ़ोन नहीं आया वो बोली की तू जहा भी है वह से निकल जा ( उनको शायद बुरा सपना दिखा) ।अक्सर पहाड़ो में रात को नदी के किनारे ऊपरी हवा लगने के ज्यादा चांस होते है.
 हम सब वहा से निकल पड़े तुरंत।
मुझे आप सब लोगो के कमैंट्स का इन्तजार रहेगा। यह मेरे लेखन का पहले प्रयास है और मैंने पूरी कोशिस की है की आप सब को इस यात्रा वर्तान्त को जीवंत अनुभव करा  सको। अगर आप सब लोगो को मेरा यह प्रयास अच्छा लगा तो में भाग दो बहुत जल्द आप लोगो के समक्ष रखूंगा ।धन्यवाद ।...............(क्रमश:)

चरित्र चित्रण :- पवन(मैं):-डेस्टिनेशन चूज़र , ट्रेवल प्लानर, क्रिएटिव आइडियाज इम्प्लीमेंटर।
कुलदीप:-डांसर, एंकर 
साहिल:- अस्सिस्टेंट ट्रेवल प्लानर,अस्सिस्टें क्रिएटिव आइडियाज      इम्प्लीमेंटर,बेस्ट मैगी शेफ।
अमित:- कम  बोलने वाला, सबका चहता,फूडी,हर परिस्तितिओ मैं ढलने वाला अक्सर हम उन्हे सरदार बुलाते है।
नंदू :-कम  बोलने वाला, सबका चहता, बहुत सीधा साफ़ इंसान।
राम:- आज्ञाकारी  शिष्ट पायलट 

        (Part-2)


                       हमारी हर यात्रा का साथी यह गैस और कुकर 
यही पर हमने डिनर किया था और यही पर कुलदीप की मोबाइल स्क्रीन टूटी थी।
                                                          BONEFIRE
                                                        BONEFIRE
                                                         BONEFIRE
BONEFIRE 


No comments:

Post a Comment