Tuesday, 28 January 2020

मेरी अविस्मरणय चोपता यात्रा सर्दियों में-भाग-3

अब हम सब वापस अपने कैंप(बनियाकुण्ड) आ गये। हम सब ने पहले अपनी अपनी सोने की जगह पर कब्ज़ा करना सुरु कर दिया । ज्यादातर कोने वाला बिस्तर ही कब्ज़ा करना चाह रहे थे लकिन यहाँ पर पहले आओ और पहले पाओ वाला नियम लागू था। सरदार(अमित )😊 को अलग बेड दिया गया।हमारे कैंप के चारो और बर्फ ही बर्फ थी और यह हम सब का पहला अनुभव था बर्फ में कैंपिंग का। सबको भूख लग रही थी तो हमने कैंप वाले को खाने का आर्डर दे दिया जो बहुत ही सिंपल और स्वादिष्ट था एक दम पहाड़ी टेस्ट । हमने अपनी अंडे की ट्रे भी उसी को दे दी अंडा करी बनवाने के लिये।अब जब तक खाना तैयार होता तब तक हमने मैगी बनाने की सोची क्यंकि भूख के मारे पेट में सबके चूहे खुद रहे थे।तो हमने अपना गैस निकाला और १० पैकेट मेग्गी के । अब हमारा शेफ( साहिल ) अपनी पूरी लह में था क्यंकि वो मेग्गी एक्सपर्ट है और जब भी उसको मेग्गी बनाने के लिये बोलो तो उसका सीना चौड़ा हो जाता है और ऐसी फॉर्म में आता है जैसे संजीव कपूर को मेग्गी बनानी इसी ने सिखाई होगी। प्याज टमाटर, हरी मिर्च,और भी पता नहीं कौन कौन से मसाले साहिल ने यूज़ किये साथ ही साथ  कैंप वाले ने हमारे लिये अलग बोनफिरे का इंतजाम कर दिया ।वहां एक ग्रुप और था जिसमे ३-४ लड़के और एक लड़की थी ।में उनके ग्रुप में गया और उनसे वार्तालाप करी तो पता चला की वो तुंगनाथ ट्रैक से आज ही वापस आये है लकिन वो आधे रास्ते से ही वापस आ गये क्यंकि बर्फ कमर  थक थी वहां। अब मेरा मन छोटा हो गया था यह सुनकर लकिन मेरा विश्वास था की में कमर तक बर्फ में भी ट्रैक करूँगा लकिन पहुंचना तुंगनाथ है हर हालत में😁 । हम सब गोल घेरा बना के बैठे हुये थे बीच में बोनफिरे और गैस जिसमे मेग्गी बनायीं जा रही थी। में साहिल का उस समय कुकिंग अस्सिस्टेंट बना हुआ था क्यूंकि दुसरो को खिलाने का भी अलग ही आनंद है। अब मेग्गी तैयार हो चुकी थी और सबके मुँह में मेग्गी को देखकर पानी आ रहा था। अब सब को अलग अलग दोने में मेग्गी परोसी गयी। उस समय सबका मुँह देख़ने लायक था ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे समुन्दर मंथन से यह मेग्गी निकली हो अमृत के समान। चारो और हम गोल सर्किल में बैठे हुये मेग्गी का आनंद ले रहे थे बीच में बोनफिरे और हमारा ब्लूटूथ स्पीकर जिसपे गाना चल रहा था(आज मौसम बेईमान है है बड़ा) ठण्ड भी काफी हो रही थी सबकी नाको से पानी बहने लगा था जिसके कारण कुछ सूरा पान करने वालो नै मेग्गी को चकना की तरह यूज़ किया और बोले की यह ज़िन्दगी का सबसे बढ़िया चकना लग रहा है आज😁।वहाँ पर एक वीडियो शूट भी हुआ(वीडियो लिंक नीचे दिया गया है)  जिसमे सबने अपना अपना अनुभव साझा किया उस वर्तमान पल का।  इसके बाद सब अपने अपने भुतहा अनुभव साझा करने लगे तभी मैने सबको रोक दिया की तुम वो शमशान  घाट वाली बात भूल गये क्या, अभी आ जाएंगी सारी नकारात्मक ऊर्जाय। सभी अवाक रहे गये की हा यह सही कह रहा है इसके बाद सबने उस ख़ूबसूरत माहोल मैं बेढंगा नृत्य किया 😁।सब के सब उस अविस्मरणय पल के साक्षी बन रहे थे। अब मैने सबको चेताया की हमे सुबह सुबह तुंगनाथ के लिये भी निकलना है ।  सब अब थक चुके थे और सब अपने अपने बिस्तर में पोजीशन ले चुके थे । बिस्तर में चार पांच लेयर की कम्बल और एक रजाई में सर्दी में भी गर्मी का अहसास हो रहा था।वहां प्रकाश नहीं था अब हलकी सी लालटेन की रौशनी में सब बिस्तर में लेटे लेटे एक दूसरे की तफरी ले रहे थे और सब खूब हंस रहे थे। सबसे ज्यादा तफरी नंदू की ली जा रही थी क्यंकि वो सीधा और साफ़ इंसान था और मजाक का पलटवार भी नहीं करता था ।सब खूब हंस रहे थे और फिर पता ही नहीं चला की नींद ने कब सबको अपने गहन आगोश में ले लिया।मेरी नीदं बहुत ही सेंसटिव है अगर हल्का सी भी आवाज आये तो मेरी नींद तुरंत खुल जाती है। रात में मेरी आँख खुली समय रहा होगा तक़रीबन २-३ बजे का मैंने कैंप के ऊपर टप टप की आवाज सुनी और में समझ गया की स्नोफॉल(बर्फ का गिरना )हो रहा है और में बिस्तर से बाहरनिकल गया क्यंकि मैंने स्नोफॉल नहीं देखा था जीवन में तो में यह पल कैसे मिस कर सकता था।मैने कैंप से  बाहर आकर देखा तो में अवाक् रह गया उस खूबसूरत रात्रि को देखकर।  चारो और सन्नाटा, चारो और सफेद बर्फ ही बर्फ। बर्फ गिर रही थी सितारों की तरह, बहुत ही शान्ति और सुंदरता थी उस पल में और ऐसा लग रहा था की यह पल देख्ते देख्ते कही में enlightened ना हो जाऊं । अचानक में होश में आया और अपनी हीरोपंती और कवी ह्रदय से बाहर निकलकर वापस अपने बिस्तर में लेट गया और उस पल को महसूस करते हुये नींद के गहन आगोश में समां गया। बाकी वर्तान्त के लिये मिलते है पार्ट-४ में-

        




2 comments:

  1. u r great buddy travelling with you is always completes my tour.

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