Friday, 24 January 2020

मेरी अविस्मरणय चोपता यात्रा सर्दियों में-भाग-2

हम सब ड्राइवर के कहने से वहां से तुरंत निकल गये। हमारे ग्रुप में मैं ही ऐसा सदस्य हूँ  जो रात के सफर में सोता नहीं है और पहाड़ो की सुबह की सुंदरता को भी मैं अपने आँखों के कैमरे से मिस नहीं करता। हमारे पायलट राम को नींद महसूस हुई और उसने गाडी को ज्वाल्पा देवी(पौढ़ी गढ़वाल) के सामने पार्क कर दिया। हम सब गाडी में बैठने से पहले ही ड्राइवर को निर्देश दे देते है कि जहा पर भी तुझे नींद फील होये तो बता देना और रेस्ट कर लेना। राम वही गाडी पार्क करके सो गया।सुबह के तक़रीबन ६ से ७ बजे का वक़्त रहा होगा अब बाकी के घुम्मकड़ भी उठ गये थे जो बोनफिरे के बाद सो गये थे।सबसे पहले मुझमे फ्रेश होने का कीड़ा जागा और उसके बाद एक एक करके सबका 😄
वहां पर जो शौचालय बना हुआ था जो व्यस्त चल रहा था और प्रेशर सबका बहुत तेज आ रहा था तो हम सब ने  साइड में नदी के पास जाने का रास्ता देखा और नीचे कि और निकल पड़े। सब नदी के किनारे अपनी अपनी पोजीशन ले चुके थे कि तभी अमित बोला जो मेरे समीप बैठा था कि यार इस कुत्ते  ने मुँह में क्या ले रखा है।मैने वहां कुछ अधजले शव देखे । एक एक करके सबको समझ आ गया कि हमने यह बहुत बड़ी गलती कर दी है अर्थार्थ वो जगह शमशान घाट थी और शमशान घाट भगवान शिव का निवास माना जाता है और हम हम वापस ऊपर कि और सड़क पर आ गए। वहां पर सबसे पहले मैने धारा( पहाड़ो से बहता हुआ प्राकर्तिक पानी ) के पानी से मुँह धोया जो में हर पर्वतीय यात्रा में करता हूँ जो मुझे बहुत अच्छा लगता है। उसके बाद हम सब ने चाय और फैन आदि खाये तब तक ड्राइवर राम कि भी नींद खुल गयी। एक चाय उसके लिये भी बोली गयी फिर अमित बोला एक चाय मेरी और बना देना फिर एक एक करके सारो नै चाय का दुबारा आर्डर दे दिया 😄। सब चाय पीने के बाद निकल पड़े स्विट्ज़रलैंड(चोपता) कि और। हम उसी घटना कि चर्चा करते रहे फिर हम सब नै उस घटना को नजरअंदाज किया क्यूंकि हम अपनी यात्रा को एन्जॉय करना चाहते थे। हमने ११ बजे के आस पास छोले परांठा खाये (श्रीनगर रोड, पौड़ी गढ़वाल) (फोटो भी डाला गया है)अब हम नॉन स्टॉप प्रकर्ति को निहारते हुये चोपता कि और बढ़ते जा रहे थे। हम तक़रीबन पांच बजे उखीमठ से आगे पहुँच चुके थे अब सफर बहुत ही खूबसूरत लग रहा था ऐसा लग रहा था कि पूरे रास्ते पर बस हम ही चल रहे है।मेरे साथ एक समस्या है जिससे मेरे साथी परेशान होते है हर पर्वर्तीय यात्रा में और वो यह है की मैं हिल्स मैं मिरर खोलके रखता हूँ ,मैं पहाड़ो की हवा का कवि की भाषा मैं वर्णन नहीं कर सकता। (आप इस नोकझोक का वीडियो पेज के अंत मैं दिये गये यूट्यूब लिंक पर क्लिक करके भी देख सकते हो-link-5) बरबस ही हम सब प्रकर्ति के सौन्दर्य में खो गये। वास्तव में कुछ साल पहले तक चोपता को कोई जानता नहीं था लकिन वर्तमान मैं हम जैसे खोजियो के यहाँ कि पिक्स एंड वीडियोस अपलोड करने के बाद अब यह स्थान भी काफी पॉपुलर हो रहा है। जनुअरी कि वो धुप मेरी यादगार धुप है, धुप बहुत ही आनंदयक लग रही थी । लाइट म्यूजिक सांग सुनते हुये सफर का मजा दुगना हुआ जा  रहा था (वीडियो लिंक भी दिया गया है-link-1-4)हमने एक जगह पर गाडी रोककर फोटो सेशन किया, हम सब बहुत ही खुश थे ,दिल्ली एनसीआर कि व्यस्त लाइफ को पीछे छोड़कर कर हम वर्तमान मैं हर पल को जी रहे थे। वास्तब मे हम स्नो देखने के लिये सब  व्याकुल हो रहे थे जो की हमे अब तक रास्ते पर नहीं मिली थी और लग रहा था की शायद नहीं मिलेगी अचानक हमे सो ग्राम स्नो के दर्शन हुए और हम सब चिल्ला उठे दस रुपय वसुल हूये फिर आगै जाकर दो सो ग्राम बर्फ देखीं तो सब बोल पड़े बीस रुपय वसुल हुए ,फिर बीस से पचास, पचास से सौ, फिर हजार और धीरे धीरे बर्फ बढती गयी और अचानक हम पहुंच चुके थे स्वीट्ज़रलैंड ऑफ़ इंडिया मे जो बर्फ मे बहुत ही खूबसूरत लग रहा था(link-2-3)हम सब आश्चयचकित थे की एका एक इतनी बर्फ और पीछे के पहाड़ी रास्तो पर बर्फ का नामो निशान नहीं था।  अब शाम हो चुकी थी और धीरे धीरे अँधेरा पैर पसार रहा था और हम अपने रात को ठहरने का ठिकाना तलाश रहे थे। हमारे रास्ते मैं बनियाकुण्ड आया और वहां हमने कुछ कैंप देखे अब  हमारे ग्रुप के तीन सदस्य(अमित, नंदू, कुलदीप)  एक दिशा में गये और साहिल और मैं अलग दिशा में गये कैंप की पूछताछ के लिये। वापस आकर जब दोनों टुकड़ियों ने अपना आउटपुट रखा तो जिस कैंप में साहिल और मैं गये थे वो फाइनल कर लिया। स्टे काफी बजट में था और खाना भी। फिर भी हमने कैंप बुक नहीं किया कि कही चोपता में इससे भी बढ़िया मिल जाये तोइसको हमने बैकअप रखा और हम चोपता कि और निकल गये । चोपता सचमुच बहुत ही खूसूरत लग रहा था उस समय, मैने तुंगनाथ महादेव कीऔर सर झुकाया(प्रवेश द्वार) हमे वहां पर स्टे नहीं मिला कियुकि सब आलरेडी बूकेड था। वहां पर हम सब ने ताज़ी ताज़ी गिरी हुई बर्फ से बहुत खेला, हम सब दुनियादारी भूल वर्तमान के हर पल का आनंद ले रहे थे कि तभी मैने सभी को चेताया कि रात हो गयी है और हमे वापस बनियाकुण्ड भी जाना है स्टे के लिये,वो भी कही बुक ना हो गया हो।फिर हम सब वापस बनियाकुण्ड कि और रवाना हो गये।रात का वो वापसी का सफर मुझे आज भी याद है वो हसी रात वो सफर ।अब हमअपने कैंप CHOPTA MEADOWS HERITAGE  CAMPS(बनियाकुण्ड) में डेरा डाल चुके थे और अब बारी थी रात को यादगार बनाने की जिसका वर्तान्त में भाग तीन में साझा करूँगा। आशा करता हु आपको यह भाग भी अच्छा लगा होगा।  धन्यवाद।.....(क्रमश:) --भाग एक पड़ने के लिये नीचे लिंक पर क्लिक करे- 
https://pawanraturi.blogspot.com/2020/01/1.html 



                                 हमारा सिग्नेचर पोज़ 
                     इस रास्ते पर बस हम ही हम है और दूर दूर तक कोई नहीं
                                           हा मुझे तुम से प्यार है प्यार है  
                             हा मुझे तुम से प्यार है प्यार है  
                                                    कुलदीप छोले परांठा खाते हुये
                                                             मस्ती टाइम
                                   बर्फ की अभी तो शुरुवात है 
To see videos related to incident-


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